नीली रौशनी वाला टेम्पो


यह एक दिन की शाम है। सूरज डूब चुका है। उसके बाद आई शाम भी जा चुकी है। अँधेरा होते ही सब जितनी जल्दी हो सके अपने घर पहुँच जाने को आतुर हो गए हैं। मैं अभी डिगिहा की तरफ से आए टेम्पो से उतरा ही था कि एक लड़का लगभग मेरी बाँह पकड़ कर खींचते हुए अपने टेम्पो की तरफ़ ले आया। तब उसने पूछा, कहाँ जइय्हओ ? मैं बोला, चिचड़ी चौराहा। बइठो फ़िर। अब्बय चलित हय। मैं सबसे किनारे वाली सीट पर जाकर बैठ गया। मुझसे पहले सिर्फ़ एक आदमी वहाँ बैठा हुआ है और अभी बहुत जगह खाली पड़ी थी। जब तक वह भर नहीं जाएगी, यह तो चलने से रहा। वह दो थे। दोनों हर उस व्यक्ति से जो उनके टेम्पो की तरफ़ देख भी लेता, पूछने लगते, चलिहओ? कोई गर्दन हिला कर मना कर देता, कोई बोलकर। जिस किसी को मेरी तरह बाँह पकड़ कर खींचने लगते वह उन्हें झिड़क देते। वह टेम्पो उन दोनों में से किसका था, पता नहीं चा रहा था।

जो अभी थोड़ी देर में टेम्पो चलायेगा, वह उस कम लंबे, गरम मिजाज़ लड़के का उतना ही साथ दे रहा था। वह अधेड़ जिसकी साइकिल को ऊपर छत पर लाद रखा था, सबसे ज़्यादा बिलबिला रहे थे। बार-बार किसी पीछे से आए टेम्पो के इस सड़क किनारे खड़े टेम्पो से पहले चले जाने पर वह धीरे-धीरे अपना गुस्सा बोलकर या बीड़ी सुलगाकर जताते जा रहे थे। उस लंबे वाले लड़के को उनमें से किसी बात का कोई फ़र्क नहीं पड़ रहा था। वह सवारियों को यह कहे जा रहा था, मजा आ जाएगा सफ़र का। जब वह आधे घंटे के बाद दो-तीन खाली सीटों के साथ चलने को तय्यार हुआ, तब उसने इंजन के साथ उन नीली बत्तियों को भी जला दिया, जो अभी तक बंद थी। अंदर से वह जगह नीले रंग में नहा गयी। हम अँधेरे से उजाले में आ गए। नीले झिलमिल उजाले में।

क्या वह अँधेरे के और गहराने के इंतज़ार में इतनी देर तक रुका रहा या सड़कें इस ठंड में एकदम सुनसान हो जाएँ, तब वह चलना चाह रहा था, इन दोनों में से किसी बात का ऐसा कोई संकेत उसने अपने आप से नहीं दिया। जब उस अँधेरे में उस सुनसान सड़क पर नीली बत्ती से जगमगाता टेम्पो उसके स्टीरियो पर बज रहे गानों की धुनों को गुनगुनाता हुआ आगे बढ़ रहा था, वह एहसास यहाँ लिख कर बताया नहीं जा सकता। जो देर अभी तक हमें खीजने पर मजबूर कर रही थी, हममें से कइयों को पैसा वसूल देरी लगने लगी। ख़ुद टेम्पो के सड़क पर भागने की अपनी धुन में बज रहे गीत की धुन मिल रही है। उस ओर जिस तरफ़ मैं बैठा हुआ हूँ, ठंडी हवाएँ गले से होते हुए अंदर जा रही हैं। उसी तरफ़ पीछे देखने वाले साइड व्यू मिरर के नीचे उसने एक लंबा सा कपड़ा बांधा हुआ है। वह उस गति की दिशा से विपरीत दिशा में उड़ रहा है। उड़ नहीं लहरा रहा है। यह किसी लड़की का दुपट्टा नहीं है। टेम्पो में कोई लड़की नहीं है। फ़िर टेम्पो के अंदर बैठी लड़कियों के दुपट्टे ऐसे नहीं लहरते। वह उसे थामे रहती हैं।

यह छोटा सा पंद्रह सेकेंड का वीडियो उसी नीली रौशनी वाले टेम्पो में बनाया था। गीत के बोल साफ़ हैं। जितना कि वह दृश्य। आज कुछ बीस दिनों भर बाद उसे यहाँ लगा रहा हूँ। शायद आप भी वहाँ पहुँच पाएँ, जिसे मैं कह नहीं पाया। फ़िर इससे भी मुझे कोई ख़ास फ़र्क नहीं पड़ता कि वह आपको कला मर्मज्ञ लग रहा है या नहीं।

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