सालगिरह तीसरी

इसे इस तरह शुरू नहीं करना चाहता. जैसे कल ही की बात हो, तीन साल बीत गए. यह एक बेकार शुरुवात होगी. भले वक़्त बीतने के साथ ऐसा लगता हो, पर उसे ऐसे कभी नहीं कहा जाना चाहिए. इसमें एक तरह का तिरस्कार भाव है, जो ज्यादा देर छिपा नहीं रह पाता. हम जिसके साथ जिंदगी भर के लिए सफ़र पर साथ निकल पड़े हैं, उसके साथ बिताये दिनों को अनजाने में कुछ कम करके आँकने जैसा लगने लगता है. मुझे पता है, कम से कम हम दोनों तो ऐसा नहीं करना चाहते. यह हमारे साथ बढ़ते कदम हैं. हम साथ-साथ बढ़ रहे हैं. इसे कुछ-कुछ समझने की जिद से भर गए हैं.

यह जिद कुछ देर के लिए हमारी आँखों से ओझल नहीं हो पाती. हम इन गुज़रते दिनों में बार-बार पुराने दिनों में लौट पड़ते होंगे. यह किसी बही खाते के मुनीम का काम नहीं है. फिर भी हम एक-दूसरे से कहते हैं, पहले जैसे नहीं रहे तुम. यह कहना कुछ इस तरह कहना है, जैसे हम उन्हीं क्षणों में रुक गए होते और सारी ज़िन्दगी गुज़र जाती. एक पल के लिए भी हम आगे नहीं बढ़ते. वहीं थम जाते. कभी तो ऐसा सोचने लगता हूँ, काश मेरे पास भी वक़्त में पीछे जाने की कोई मशीन होती. कितनी ही चीजों में अपने इस तरह होने को होने से रोक देता. पता है, तुम भी इसी इच्छा से भर गयी होगी. अब जबकि हम ऐसा कुछ भी नहीं कर पा रहे हैं, बस इतना सोचते हैं, वही हो, जो हम चाहें. यह सारे दिन ज़ल्दी से हमारे काबू में आ जाएँ.

अगर अपनी बात करूँ, तब लगता है, और ऐसा पहली बार नहीं लगा है, कई बार लग चुका है, हम लड़कों को शादी के बाद किस तरह नयी भूमिका में ख़ुद को उतारना है, इसकी बकायदा ठीक ठाक समझ होनी चाहिए. इसे प्रशिक्षण नहीं कह रहा हूँ. समझ और प्रशिक्षण में मूलभूत अंतर है. प्रशिक्षण इसलिए नहीं हो सकता क्योंकि वह पुनरुत्पादन करेगा. हमें समझ चाहिए. आने वाली ज़िन्दगी में ख़ुद को देखे जाने का पूर्वानुमान नहीं पर उसका कुछ कुछ अंदाज़ ज़रूर होना चहिए.

खैर, अभी इस पर नहीं लिखने वाला. वापस लौटते हैं. लौटुंगा नहीं तो बात कहीं और चली जायेगी. इसलिए भी.

बस मुझे इतना पता है, इन तीन सालों में कई सारे सपनों को अपनी जेब में रखकर चल रहे हैं. कितनी ही मर्तबा उनसे हारते रहे हैं. इन हारों को डायरी में दर्ज करने की आदत पीछे छूटती रही है. दुःख को महसूस करने की क्षमता पसीने को महसूस करने की तरह बनती गयी है. कभी-कभी तो लगता है, वह महसूस ही नहीं हो रहा है. हारे हुए दिनों को तब भूल जाता हूँ, जब तुम साथ होती हो. इसी तरह हमेशा साथ रहना. और अपने सपने भी मुझे बताती रहना. अभी के लिए इतना ही.

तुम्हें भी सालगिरह मुबारक.

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