हत्या

कोई होता है, जिसे मारा जाना है. किसे मारा जाना है, शायद यह सिक्का उछालकर वह तय करते होंगे. वह कौन? हत्यारे. जो हत्या करेंगे. वह राज्य की उत्पत्ति के सिद्धांतों को रेखांकित कर रहे हैं. वह उसकी बर्बरता को प्रकाश में ला रहे हैं. राज्य बर्बर लोगों का समूह है, जो किसी प्रतिद्वंदी मान लिए गए व्यक्ति की हत्या के भाव से भरता रहता है. यह किसी की हत्या तो करते हैं पर असल में डरे हुए लोग हैं. इनमें हिम्मत की भारी कमी होती है. यह अपनी पहचान ज़ाहिर नहीं करना चाहते. यह हमेशा सैनिक बने रहना चाहते हैं. वह सैनिक, जिनकी इकठ्ठा की गयी लाशों पर राज्य की नींव रखी जाती है. 

यह राज्य जितना भौतिक नहीं होता, उससे ज़्यादा इसकी संरचना हमारे मनों में बैठ रही होती है. यह जोखिम भरा काम है, किसी में हमेशा डर की तरह बने रहना. कोई गंध, कोई रंग, कोई प्रतीक इनकी मदद करने के लिए मेहनत से गढ़ा जाता है. यह प्रचलित विचारों की अपनी कढ़ाई लेकर चलते हैं. विचार तले जाते हैं. जैसे-जैसे माँग बढ़ती है, बेसन में रंग घोला जाता है.

असल में यह सब हलवाई होते हैं. उनका राज्य तोंद निकले हुए महाजन की रसद से बनता है. वह राज्य की एवज़ में सबको नींबू की तरह निचोड़ता है. वह पानी का ठेला नहीं लगता, कई मंजिला घर में रहता है, जिसे देख कर हम अपने घरों में कुआँ खोदकर मर जाने की इच्छाओं से भर जाते हैं.

यह मरने की इच्छा हमारे अन्दर कैसे घर करती है और इसका उन सैनिकों को पता कैसे चलता है, इस रहस्य से अभी परदा नहीं उठा है. वह एक एक कर हम सबकी हत्या कर देंगे. उनका राज्य बच जाएगा.

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