छज्जा

हम लोगों ने छज्जों को क्यों बनाया होगा? उनके लिए कभी किसी ने कितना सोचा होगा. कितने समय का फ़ासला तय करके यह हम तक पहुँचे होंगे. छज्जों को हम आविष्कार क्यों नहीं मानते? वह कौन होगी, जिसने इन छज्जों के बारे में पहली बार सोचा होगा? सिर्फ़ सोचा भर नहीं, उन्हें बना भी दिया होगा. घर के अन्दर भी. घर के बाहर भी. पर हम इन छज्जों का करेंगे क्या? इस सवाल का एक जवाब मेरे पास है. मैंने कभी यह तय किया होगा कि अपने खाने में से रोज एक टुकड़ा रोटी बचाकर उस खिड़की वाले छज्जे की तरफ़ डाल दूँगा. यह वही खिड़की है, जिसपर हमने अपने बचपन से कूलर को आधी खिड़की घेरे देखा है. खिड़की पर रखे कूलर की वजह से हम कभी उन अमलतास और गुलमोहर के पेड़ों को देख भी पाते. आम वाला पेड़ अशोक के पेड़ में कहीं छिप जाता और अपनी परछाईं में गुम हो जाता. एक दिन अचानक मैंने उसी खिड़की से कूलर के बगल झाँक कर देखा. मेरे हाथ धोने से पहले जेब से उस टुकड़े को वहीं नीचे छज्जे पर डालने की आदत ने वहाँ रोटी और पराठों के टुकड़ों का पूरा ढेर इकठ्ठा कर दिया था. उन पर धूल की परत बता रही थी, वहाँ कभी कोई एक चिड़िया भी नहीं पहुँच पायी थी. 

थोड़ी देर वहीं खड़ा रहा. सोचता रहा. चिड़िया आख़िर क्यों नहीं पहुँची होगी. उसे भूख नहीं लगती होगी? वह भूख लगने पर अगर इन टुकड़ों तक नहीं पहुँच पायी, तब वह क्या खाती होगी? क्या उसे रोटी पसंद नहीं है? पराठा भी नहीं. सवाल बहुत सारे थे. जवाब कोई नहीं था. मैंने फ़िर कुछ देर कुछ सोचा और अगली बार से छज्जा बदल दिया. लगा, चिड़िया के लिए यहाँ आना थोड़ा मुश्किल है शायद. किसी दूसरे छज्जे पर उन रोटी के अन खाए टुकड़ों को देख नहीं पाती होगी. अब इस वाले को देख लेगी, तब आया करेगी. अपनी सहेलियों, दोस्तों को भी ले आया करेगी.

एक बार दिमाग में ख़याल आया, शायद इस तरह चिड़िया मेरे चयन को अस्वीकार कर रही होगी. उसे मुझसे रोटी नहीं लेनी कुछ और लेना होगा. वह शायद अपनी जगह हमसे माँग रही थी. यह दुनिया जितनी हमारी नहीं है, उससे जादा कभी इन पंछियों की रही होगी. हम इनसे कुछ सीख भी नहीं पाए. कभी हमने इनके घोंसले को देख कर भी कुछ नहीं किया. यह हमारे ज्ञान की निर्मितियों के चुक जाने का इशारा भर था. इशारा जो हम नहीं समझे.

{यह उल्लू अगर इसी तरह चलता रहा, तब यह, 
वह एक कदम भी बढ़ाएगा, जब वह इस तस्वीर से बाहर चला जाएगा. 
यह बिलकुल उसी तरह घटित होगा, जैसे हमारे छज्जों से चिड़िया बिन बताये कहीं दूसरी दुनिया में चली गयी है.}

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