शहर होना

शहर अपने आप को चुम्बक समझता है. हम अपने शरीर में मौजूद सारे लोहे को इकठ्ठा कर उससे चिपके रहते हैं.

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

उदास शाम का लड़का

मोहन राकेश की डायरी