जाना

यह जाना अक्सर सफर में होने जैसा है। जैसे ही यह भाव मुझमें भरने लगता है, मैं कुछ कम होने लगता हूँ। उन क्षणों में वह कल्पना भी मेरा साथ नहीं दे पाती, जहाँ अपनी अनुपस्थिति को इसके सहारे भरने को होता हूँ। अगले दस दिन जहाँ नहीं हूँ, वही रिक्तता बनकर मेरे रोयों में भर रही है। इस कुर्सी मेज़ के इर्दगिर्द खुद को समेटे मेरे दिन, रात, शाम सब यहीं रह जाएँगे। ऐसा भी समझ नहीं पाता हर बार मुझे वही भाव लिखने का मन क्यों होता है जब थोड़ी देर में चलने वाला होता हूँ। यह क्षण मुझे सबसे ज़्यादा घेरते हैं। अपनी तरफ़ खींचते हैं। कल जब घर से दूर कहीं शाम ढल चुकी होगी, तब किन ख़यालों में डूब रहा होऊंगा? यह कल शाम को अभी से अपने मन के कैनवस पर ढाल लेने की ज़िद नहीं हैं। बस यह ऐसी ही कोई इच्छा है। ऐसे बहुत सारी इच्छाओं से उन गुज़रते लम्हों में उतरता जाऊंगा। कोई भी नहीं होगा। जो किसी दरवाजे खिड़की के सहारे अंदर दाख़िल हो जाये। दोपहर या उसके घटित होने से काफ़ी पहले किसी क्षण गाड़ी घगरा का पुल पार करेगी। फ़िर मेरे सामने वह सारी स्मृतियाँ घूम जाया करेंगी। यह तब सबसे मुश्किल पल होते हैं, जब आप अकेले सफ़र कर रहे होते हैं। किन भावों से कौन सी याद अंदर चली आएगी, कुछ पता नहीं चलता। हम दोनों तरफ़ से इस नदी को देख लेने की इच्छा से भरे रहते हैं। मम्मी साथ होतीं तो सिक्का निकाल कर उसमें फेंकने वाले पन्ने सामने घूम जाते। पर क्या करूँ? अकेला हूँ। साथ में अनजाने अपरिचित सहयात्री हैं। किन्हीं से बात भी कर रहा हूँ, कह नहीं सकता।

इस अकेले निकलने में यही सबसे खराब बात है। हर पल यही लगता रहता है, यहाँ कुछ ऐसा है, जिससे कई सारी बातें न कहकर, बिलकुल चुपचाप चला जा रहा हूँ। इन ठंड के दिनों में कमीज़ के अंदर अंदर गरम बानियान पहनकर घूमने वापस कमरे में लौट कर आने और इस तरह लिखने के अलावे भी बहुत सारी बातें हैं, जिन्हें कह नहीं पा रहा होऊंगा। मुझे यह भी पता है, यह सिर्फ़ घर से निकलने से पहले के भावुक अतिरेकी क्षण हैं। जिन्होंने मुझे घेर लिया है। इसे भावुकता कहने से कोई बचना भी चाहेगा, तब भी इसके अलावे वह कौन सा शब्द इस्तेमाल कर पाएंगे, यह उनकी बुद्धि कौशल से ज़्यादा उनके किरदार का सवाल होगा। मैं कुछ इस कदर अंदर खोया हुआ हूँ कि इसी से अपनी बात कह रहा हूँ। यह अगली सुबह रेलगाड़ी से उतरने और फ़िर अगले एक सौ चालीस किलोमीटर के लिए बस पकड़ने के भीतर समाने वाली बात नहीं हैं।

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