दिन तुम्हारा

जन्मदिन किसी का भी हो, उसकी सबसे कोमलतम स्मृतियाँ माँ के पास होती हैं । वह जो हमें नौ महीने गर्भ में रखती है । एक-एक क्षण अंदर पल रहे बच्चे के गर्भ से बाहर आने का इंतज़ार कर रही होती है । इस प्रतीक्षा में गेहूँ की सुनहरी होती बालियों की दमक भी है और उसे छूने की लालसा भी । आज तुम कितने साल के हो गए कल पूछ नहीं पाया ? तुमने बस इतना कहा, कल गायब रहना चाहता हूँ । तभी आज कोई बात नहीं की है । बस हमने तुम्हारे गायब होने में मदद की है । तुम्हारी यह इच्छा पता नहीं मुझे कैसा कर गयी है ? अँधेरा शाम ढलने के बाद छत पर बिखर गया है । कोई दिख नहीं रहा है । मैं बस इस क्षण में तुम्हारे बनने के सालों को याद कर लेना चाहता होऊंगा । बहुत सारी बातें एक साथ ऊपर गले तक आकर बाहर आ जाना चाहती होंगी । पता नहीं यह कैसा भाव है ? इसमें भावुकता भी है या नहीं कह नहीं सकता?

तुमसे तुम्हारे घर के छोटे-छोटे किस्से सुनते रहना चाहता हूँ । ख़ुद उन मुलाक़ातों में चुप रहने की इच्छा को अभी पास नहीं धरा है पर तुमसे कुछ कहलवाने के लिए उन किस्सों की तरफ तुम्हें जाते हुए देखना अच्छा लगता है । कोई है, जिसमें भावुकता बची हुई है । तुम्हारे हृदय की यही नमी अपने खराब दिनों के लिए अपने अंदर बचा लेना चाहता हूँ । यह उम्र में बढ़ते हुए किसी छूट गयी चीज़ को पा लेने जैसा है । यह सब बातें, तुम्हें लग रहा होगा तुम्हारे लिए लिख रहा हूँ, ऐसा बिलकुल मत सोचना । यह बिलकुल वही बात है, ख़ुद के बाहर अपने विस्तार को देख कर हम ऐसे ही होते रहते होंगे । अपने दिनों में जो हम नहीं कर पाये, उसे किसी को करते हुए इतनी पास से देखना है । यह उपमा तुम्हें देना नहीं चाहता कि कच्ची मिट्टी को कुम्हार जिस तरह से गूँदता, रौंधता है, यह वक़्त भी तुम्हें ऐसे करेगा । हम भले वहाँ हों या न हों पर चाहते हैं, तुम इस बुनावट को समझ सको । इस निर्मम समय में जबकि हम सब एक खास तरह की जीवनशैली में ढल रहे हैं, हमें खुद को बचाने कि लड़ाई खुद लड़नी होगी ।

पता नहीं, हम कहाँ तक साथ होंगे ? पर मेरे अंदर यह इच्छा हमेशा से बची और बनी रही है कि अपनी नज़र को बहुत सतर्कता से तुम्हें बता सकूँ । यह सचेत होकर एक-एक बात को करीने से लगाने की तरह न भी हो, तब भी मेरे अंदर इच्छा का रुप यही होगा । तभी यह इच्छा भी मेरे अंदर से तुम तक गयी। जिसे मैंने बस देखा है । यह जो कागज पर या यहाँ लिख देना है, यह खुद को मुक्त करना है । तुम इसका अभ्यास करते रहो । इससे कुछ हो या न हो हमारी खुद से पहचान मजबूत होती रहेगी । जब तक हम खुद से ईमानदार नहीं होंगे, यह दुनिया हमें अपनी तरह गढ़ती रहेगी । हमें उसे ख़ुद गढ़ना है । बस आखिर में बहुत सारी शुभकामनायें । ख़ूब पढ़ो और जितना पढ़ो उससे कई गुना लिखो । जन्मदिन बहुत बहुत मुबारक़ ।

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