कैसे?

कैसे वह अपनी माँ के न रहने की बात कह पाया होगा? कब उसने सोचा होगा, इस बात को कह दिया जाना चाहिए. मैंने जबसे उसके लिखे उन शब्दों को पढ़ा है, अन्दर से थोड़ा खाली हो गया हूँ. जीवन जहाँ हमें उल्लास से भरता है, मृत्यु की सूचना हमारे खोखलेपन को ज़ाहिर कर देती है. कुछ भी नहीं है, जो उस मृत्यु के भाव की बराबरी कर सके. मुझे यह बात शायद यहाँ नहीं लिखनी चाहिए, पर मेरी कुछ समझ में नहीं आ रहा है. यह ख़बर जब से मिली है, कमरे से भाग जाना चाहता हूँ. जो हमें इस दुनिया में लायी, उसके अब न होने के एहसास को वह कैसे महसूस कर रहा होगा? वह सिर्फ़ एक माध्यम भर नहीं है. अपने आप में एक दुनिया का नक्शा है. वह हमें बताती है, कौन क्या है? पर यह नहीं बताती, उसके नहीं रहने, आँखों से ओझल हो जाने पर क्या करना बचा रह जाता है? वह बताये भी तो कैसे, उसके बताने के पीछे छिपे भाव को पहचान कर हम उदास हो जायेंगे, ऐसा सोचकर वह चुप हो जाती होंगी. चुप होना, समझ जाना है. इससे आगे कुछ नहीं कहना. वह एक दिन ख़ुद जान जाएगा. जान लेना ज़रूरी नहीं. ज़रूरी है, साथ रह जाना. रहने में जो साथ यादें होंगी, कुछ कही कुछ अनकही आवाज़ें होंगी, वह सपने बनकर अब सोने नहीं देंगी. उस वक़्त धीरे से वक़्त माँ की आवाज़ सुन लेने की ख्वाहिश होगी. पूरी होगी या अधूरी रह जायेगी, पता नहीं.

शाम इधर से फ़ोन किया, घंटी बजने लगी. दिल उतनी ही तेज़ी से धड़कता रहा. कैसे बोल पाऊँगा कुछ? क्या यह अब पूछने वाला सवाल रह गया है? उसने बताया था कभी, उसकी माँ की तबियत अब ठीक नहीं रहती. इधर हम दोस्ती के ऐसे दौर में हैं, जब कई-कई साल बिन बात हुए बीत जाते हैं, बिन बताये ही एक-दूसरे को याद कर लेते हैं. वह कितना बुलाता रह गया, पर वह दिन कभी नहीं आया कि एक शाम हम उससे मिल आएँ. फ़िर मुझे शुरू से लगता रहा है, मुझमें किसी को सांत्वना देने की हिम्मत कभी नहीं रही. वह कैसे शब्द होते होंगे, नहीं पता. पर मम्मी को बताया, तो बोलीं, खुशी में न सही, गम में ज़रूर बात कर लेनी चाहिए. तभी से सोच रहा हूँ, कुछ कह भी पाऊँगा?

टिप्पणियाँ

  1. खुशी में न सही, गम में ज़रूर बात कर लेनी चाहिए.
    ..बिलकुल सच बात .. लेकिन गम में कैसे कहें इसका भी सलीका जरुरी है

    बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं

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    उत्तर
    1. अभी तक बात हो नहीं पायी है.

      खैर, आपको भी बहुत शुभकामनायें..:)

      हटाएं

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