तीन ड्राफ्ट बाद

कल से तीन बार ड्राफ्ट कर चुका हूँ पर समझ नहीं पा रहा, क्या है, जिसे कहने का मन है? वह कैसे इस कहने में आ नहीं पा रहा. कोई बात कभी-कभी वक़्त लेती होगी. जैसे उसे शब्दों की कोई दरकार नहीं है. पर वह कुछ इस तरह की है, जो एक बार कह दी जाए, तो बढ़िया होगा. फ़िर लगता है, एक नहीं, कई सारी बातें होंगी. गड्डमड्ड सी. यहाँ उन्हें सिलसिलेवार कहने की कोई कोशिश नहीं होने वाली. उतना कह पाना ठीक भी नहीं है. कई ऐसे हैं, जो अपनी कतरनें नहीं दिखाते, कहते हैं 'पसर्नल' है. हमारे सामने कोई ऐसी बात कहे और चला जाये, होता नहीं है. पर क्या करें कभी-कभी हो भी जाता है. कुछ हैं, जिन्हें छोड़ देते हैं. होगा कोई, जो नहीं कहना चाहता.

मैं, उस तस्वीर के होंठों के असुंदर और उनके मुलायम न होने पर जो भाव घर कर जाता है, वह किसी को कैसा होता होगा? यह सोच रहा हूँ. क्या इसीलिए उसने इस तस्वीर को ही चुना? क्या वह ऐसा करके किसी को अपनी तरफ़ खींच सकने वाले ताप से भरी हुई है. ऐसा उसे लगता होगा. वह चाहकर भी उन छवियों से बाहर नहीं निकल पायी. हम नहीं चाहते होंगे, तब भी ऐसे हो जाते होंगे कभी.

फ़िर वह दूसरी तस्वीर, जिसमें घुटनों के ऊपर तक मेंहदी लगी हुई है. वह बता रही है, शादी के तुरंत बाद वह हिंदुस्तान से उड़ गए हैं. यहाँ नहीं रुके हैं. लेकिन उनसे यह सवाल कोई नहीं पूछता, पैसा दहेज़ का था, या वह लड़कियों के घर से लिए धन को क्या कहना पसंद करते हैं. पैसा, पैसा होता है, जिससे उस हवाई जहाज की टिकट खरीदी गयी होगी. सोचता हूँ, लड़की कभी कह पाएगी, उसके पैसों से वह शादी के बाद विदेश घूमने गए थे? 

ऐसे ही आज लौटते हुए एक दोस्त मिल गया. मिल ही गया कहना चाहता हूँ. मैं सीढ़ियों से ऊपर आ रहा था और वह उन्हीं ऊपर से नीचे आ रही सीढ़ियों से नीचे जा रहा था. रात, साढ़े नौ पार कर चुकी थी. वह पौने दस के करीब होगी. हम रुक गए. कल उससे मिलने की बात कहकर अपनी कही सारी बातों को अपने अन्दर दोहराने लगे. पर आज गया नहीं. मन नहीं हुआ. नींद आ रही थी. खाना खाने के बाद नींद आ ही जाती है अब. उसे भी कह दिया. आज मन नहीं कर रहा. जो दो और दोस्त उसके घर पर मिलने आने वाले थे, उनमें से एक अभी अभी नौकरी वाला हुआ है और दूसरा मेरी तरह नौकरी की तलाश में ख़ुद को समेटे हुए है. पहले वाले ने फ़ोन नहीं उठाया, शायद वह इशारा समझ गया होगा. दूसरे' वाले ने उठाया और शायद उसे कोई काम रहा होगा, वह भी नहीं आया.कभी मिल लेंगे. जब मिलना ज़रूरी लगेगा.

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