एक अप्रैल का दिन..

जितने भी लोग आज एक अप्रैल को “fool’s day” के रूप में मना रहे हैं, उनकी पहचान को रेखांकित करने की ज़रूरत है। यह उसी जमात के लोग हैं, जिनकी नज़र में यह दुनिया बहुत समझदार लोगों की बनाई हुई है। उनकी दुनिया का हर दिन बहुत ही दिमागदार और तेज़तर्रार बीतता है। कितने ही विचार विमर्श तो वहाँ मिनटों में निपटा दिये जाते होंगे जैसे।

ऐसे ही समझदार दिमागदार लोग एक दिन मिले और उन्होंने एक दिन मूर्खों और कम दिमागदार लोगों के लिए तय कर दिया। यह उनका सम्मान नहीं था, उनके उपहास का एक और दिन था।

इस दिन तो सब समान्य से अधिक बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करते हुए ‘चाचा चौधरी’ बनते नज़र आते हैं। कम्प्यूटर से भी तेज़। ‘आज तक’ के ‘सबसे तेज़’ से भी तेज़। बुलेट ट्रेन से तो ख़ैर वह आगे रहने ही वाले हैं। कोई उन्हें मूर्ख नहीं बना सकता। यह अहंकार, एक दर्प का निर्माण करता है। और उन सभी को जो हरदम दिमाग का इस्तेमाल नहीं करते, उन्हें बेदख़ल करता हुआ, अपने दिमाग की सीमा से बाहर खदेड़ देता है।

यह सब उन चालक लोगों की चाल है, जो हमें कहीं का नहीं रहने देना चाहते। संवेदना को कहीं कोई जगह नहीं मिलती। सब अधिक संवेदनशील व्यक्ति को पागल तक कह देते हैं, जबकि उनके पागल के मानी कितने बेमानी हैं, उन्हें ख़ुद नहीं पता। ऐसे ही दिन एक कोमल दिल वाला लड़का किसी लड़की को हिम्मत जुटाकर अपने दिल में उमड़ने घुमड़ने वाली बात कहता है, और वह लड़की उसे भी इस दिन की एक बात मानकर छोड़ देती है।

यह उसके दिल का दिन रहा होगा। एक अप्रैल तो तारीख़ बहुत बाद की दी हुई है।

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